Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.228.34: वे दान देते थे, कर आदि देकर धन इकट्ठा करते थे और आर्य लोगों के आचरण और विचार के अनुसार जीवनयापन करते थे। वे दया करना जानते थे। वे दूसरों के प्रति अत्यंत दयालु थे। वे सभी स्वभाव से सरल और दृढ़ भक्ति वाले थे। उन्होंने अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली थी। | mahabharat अध्याय 12.228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे दान देते थे, कर आदि देकर धन इकट्ठा करते थे और आर्य लोगों के आचरण और विचार के अनुसार जीवनयापन करते थे। वे दया करना जानते थे। वे दूसरों के प्रति अत्यंत दयालु थे। वे सभी स्वभाव से सरल और दृढ़ भक्ति वाले थे। उन्होंने अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली थी।
They used to give charity, collect wealth by paying taxes etc. and lived with the conduct and thinking of the Aryan people. They knew how to show mercy. They were very gracious towards others. They were all simple by nature and had strong devotion. They had conquered their senses.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥