Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.228.32: वह श्रद्धावान था। उसने क्रोध पर विजय प्राप्त कर ली थी। वह दानशील था। वह दूसरों के गुणों में कभी दोष नहीं देखता था और ईर्ष्या से रहित था। वह अपनी स्त्री, पुत्र और मन्त्रियों आदि का भरण-पोषण करता था॥ 32॥ | mahabharat अध्याय 12.228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह श्रद्धावान था। उसने क्रोध पर विजय प्राप्त कर ली थी। वह दानशील था। वह दूसरों के गुणों में कभी दोष नहीं देखता था और ईर्ष्या से रहित था। वह अपनी स्त्री, पुत्र और मन्त्रियों आदि का भरण-पोषण करता था॥ 32॥
He had faith. He had conquered anger. He was generous. He never found fault with the qualities of others and was free from jealousy. He used to support his wife, son and ministers etc.॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥