श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.228.3 
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
श्रिया शक्रस्य संवादं तं निबोध युधिष्ठिर॥ ३॥
 
 
अनुवाद
इस विषय में इन्द्र और लक्ष्मी के बीच हुए वार्तालाप की प्राचीन कथा का उदाहरण यहाँ दिया गया है। युधिष्ठिर! इसे ध्यानपूर्वक सुनो। ॥3॥
 
Here is an example of the ancient story of the conversation between Indra and Lakshmi in this regard. Yudhishthira! Listen to it carefully. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)