Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.228.29: लक्ष्मी बोलीं - इन्द्र! मैं उन प्राणियों के भीतर सदैव निवास करती हूँ जो अपने धर्म का पालन करते हैं, जिनका धैर्य कभी डगमगाता नहीं और जो सुखपूर्वक स्वर्ग प्राप्ति के साधनों में लगे रहते हैं। | mahabharat अध्याय 12.228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
लक्ष्मी बोलीं - इन्द्र! मैं उन प्राणियों के भीतर सदैव निवास करती हूँ जो अपने धर्म का पालन करते हैं, जिनका धैर्य कभी डगमगाता नहीं और जो सुखपूर्वक स्वर्ग प्राप्ति के साधनों में लगे रहते हैं।
Lakshmi said - Indra! I always reside within those beings who follow their religion, never waver in their patience and are happily engaged in the means of attaining heaven.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥