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mahabharat 12.228.27: सत्य और धर्म से बँधा हुआ मैं राक्षसों के साथ रहता था। अब यह देखकर कि वे धर्म के विरुद्ध हैं, मैंने आपके साथ रहना स्वीकार किया है॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 12.228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.228.27 
असुरेष्ववसं पूर्वं सत्यधर्मनिबन्धना।
विपरीतांस्तु तान् बुद्‍ध्वा त्वयि वासमरोचयम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
सत्य और धर्म से बँधा हुआ मैं राक्षसों के साथ रहता था। अब यह देखकर कि वे धर्म के विरुद्ध हैं, मैंने आपके साथ रहना स्वीकार किया है॥ 27॥
 
Bound by truth and Dharma, I used to live with the demons. Now, seeing that they are against Dharma, I have chosen to live with you.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)