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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना
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श्लोक 26
श्लोक
12.228.26
धर्मनित्ये महाबुद्धौ ब्रह्मण्ये सत्यवादिनि।
प्रश्रिते दानशीले च सदैव निवसाम्यहम्॥ २६॥
अनुवाद
जो प्रतिदिन धर्म का पालन करने वाला, अत्यंत बुद्धिमान, ब्राह्मणभक्त, सत्यवादी, विनम्र और दानशील है, उसमें मैं सदैव निवास करता हूँ॥26॥
I always reside in a person who daily follows religious principles, is extremely intelligent, a Brahmin devotee, truthful, humble and charitable. 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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