Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.228.25: हे बलसूदन! मैं उस वीर राजा के शरीर में सदैव विद्यमान रहता हूँ जो युद्ध से कभी पीछे नहीं हटता और विजय से सुशोभित है॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 12.228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.228.25 
जितकाशिनि शूरे च संग्रामेष्वनिवर्तिनि।
निवसामि मनुष्येन्द्रे सदैव बलसूदन॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे बलसूदन! मैं उस वीर राजा के शरीर में सदैव विद्यमान रहता हूँ जो युद्ध से कभी पीछे नहीं हटता और विजय से सुशोभित है॥ 25॥
 
O Balasudan! I am always present in the body of a valiant king who never retreats from a battle and is adorned with victory. ॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)