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mahabharat 12.228.20: लक्ष्मीजी बोलीं - इन्द्र! तीनों पुण्यलोकों के समस्त प्राणी मुझे प्राप्त करने के लिए बड़े उत्साह से प्रयत्न करते रहते हैं॥20॥   |   mahabharat अध्याय 12.228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.228.20 
श्रीरुवाच
पुण्येषु त्रिषु लोकेषु सर्वे स्थावरजङ्गमा:।
ममात्मभावमिच्छन्तो यतन्ते परमात्मना॥ २०॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मीजी बोलीं - इन्द्र! तीनों पुण्यलोकों के समस्त प्राणी मुझे प्राप्त करने के लिए बड़े उत्साह से प्रयत्न करते रहते हैं॥20॥
 
Lakshmi said – Indra! All the living creatures of the three virtuous worlds keep trying with great enthusiasm to attain me. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)