श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.228.2 
भीष्म उवाच
मन एव मनुष्यस्य पूर्वरूपाणि शंसति।
भविष्यतश्च भद्रं ते तथैव न भविष्यत:॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म ने कहा- युधिष्ठिर! तुम्हारा कल्याण हो। जिस व्यक्ति का उत्थान या पतन होने वाला है, उसका मन पहले ही संकेत दे देता है।
 
Bhishma said- Yudhishthira! May you be blessed. The mind of a person who is about to rise or fall reveals the signs beforehand.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)