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mahabharat 12.228.19: इन्द्र ने कहा, "चारुहासिनी! तुम कौन हो? और किस उद्देश्य से यहाँ आई हो? हे सुन्दर भौंहों वाली देवी! तुम कहाँ से आई हो? और शुभ! तुम कहाँ जाना चाहती हो?॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.228.19 
शक्र उवाच
का त्वं केन च कार्येण सम्प्राप्ता चारुहासिनि।
कुतश्चागम्यते सुभ्रु गन्तव्यं क्व च ते शुभे॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र ने कहा, "चारुहासिनी! तुम कौन हो? और किस उद्देश्य से यहाँ आई हो? हे सुन्दर भौंहों वाली देवी! तुम कहाँ से आई हो? और शुभ! तुम कहाँ जाना चाहती हो?॥19॥
 
Indra said, "Charuhasini! Who are you? And for what purpose have you come here? O goddess with beautiful eyebrows! From where have you come? And Shubh! Where do you want to go?॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)