श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.228.16 
सावरुह्य विमानाग्रादङ्गनानामनुत्तमा।
अभ्यागच्छत् त्रिलोकेशं देवर्षिं चापि नारदम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
देवदूतों में श्रेष्ठ देवी लक्ष्मी उस विमान के आगे से उतरकर भगवान इन्द्र और देवी नारद के पास आईं॥16॥
 
Goddess Lakshmi, the best among the angels, came down from the front of that plane and came to Lord Indra and Goddess Narad. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)