Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.228.13: वह तेजोमय विमान भगवान विष्णु का था, जो अतुलनीय था और अपनी दिव्य प्रभा से तीनों लोकों को प्रकाशित कर रहा था। वह भी उसी आकाशमार्ग पर चल रहा था जिस पर सूर्य और गरुड़ चलते हैं। | mahabharat अध्याय 12.228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह तेजोमय विमान भगवान विष्णु का था, जो अतुलनीय था और अपनी दिव्य प्रभा से तीनों लोकों को प्रकाशित कर रहा था। वह भी उसी आकाशमार्ग पर चल रहा था जिस पर सूर्य और गरुड़ चलते हैं।
That effulgent aircraft was that of Lord Vishnu, which appeared incomparable, illuminating the three worlds with its divine radiance. It was also moving on the same sky path on which the Sun and Garuda move.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥