श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 228: दैत्योंको त्यागकर इन्द्रके पास लक्ष्मीदेवीका आना तथा किन सद्‍गुणोंके होनेपर लक्ष्मी आती हैं और किन दुर्गुणोंके होनेपर वे त्यागकर चली जाती हैं, इस बातको विस्तारपूर्वक बताना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.228.13 
तत् सुपर्णार्कचरितमास्थितं वैष्णवं पदम्।
भाभिरप्रतिमं भाति त्रैलोक्यमवभासयत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वह तेजोमय विमान भगवान विष्णु का था, जो अतुलनीय था और अपनी दिव्य प्रभा से तीनों लोकों को प्रकाशित कर रहा था। वह भी उसी आकाशमार्ग पर चल रहा था जिस पर सूर्य और गरुड़ चलते हैं।
 
That effulgent aircraft was that of Lord Vishnu, which appeared incomparable, illuminating the three worlds with its divine radiance. It was also moving on the same sky path on which the Sun and Garuda move.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)