Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.227.97-98h: जैसे ऋणदाता ब्याज जोड़कर ऋण लेने वाले को कष्ट देता है, वैसे ही वह समय, दिन, रात, महीना, क्षण, काष्ठ, लकड़ी और यहाँ तक कि 'काल' की गणना जोड़कर जीवों को कष्ट देता है। ॥97 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अहोरात्रांश्च मासांश्च क्षणान् काष्ठा लवान् कला:॥ ९७॥
सम्पीडयति य: कालो वृद्धि वार्धुषिको यथा।
अनुवाद
जैसे ऋणदाता ब्याज जोड़कर ऋण लेने वाले को कष्ट देता है, वैसे ही वह समय, दिन, रात, महीना, क्षण, काष्ठ, लकड़ी और यहाँ तक कि 'काल' की गणना जोड़कर जीवों को कष्ट देता है। ॥97 1/2॥
Just as a lender troubles the borrower by adding the interest rate, similarly, he troubles the living beings by adding the calculation of time, day, night, month, moment, wood, wood and even 'kaal'. ॥97 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥