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पुराण: शाश्वतो धर्म: सर्वप्राणभृतां सम:॥ ९६॥
कालो न परिहार्यश्च न चास्यास्ति व्यतिक्रम:।
अनुवाद
काल अनादि (सनातन), सनातन, धर्मस्वरूप है और सभी जीवों के प्रति समदृष्टि रखता है। काल को कोई टाल नहीं सकता, न ही कोई उसका उल्लंघन कर सकता है।
‘Time is ancient (eternal), eternal, the embodiment of Dharma and has an equal view towards all living beings. Time cannot be avoided by anyone and no one can violate it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥