Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.227.95-96h: देहधारी प्राणी प्रमादवश सो जाते हैं; किन्तु समय सदैव जागृत और सजग रहता है। किसी ने पहले कभी नहीं देखा कि प्रयत्न करने से समय को पीछे धकेला जा सकता है॥95 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अप्रमत्त: प्रमत्तेषु कालो जागर्ति देहिषु॥ ९५॥
प्रयत्नेनाप्यपक्रान्तो दृष्टपूर्वो न केनचित्।
अनुवाद
देहधारी प्राणी प्रमादवश सो जाते हैं; किन्तु समय सदैव जागृत और सजग रहता है। किसी ने पहले कभी नहीं देखा कि प्रयत्न करने से समय को पीछे धकेला जा सकता है॥95 1/2॥
‘The embodied beings fall asleep in negligence; but time is always alert and awake. No one has ever seen before that time can be pushed back by someone's efforts.॥ 95 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥