Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.227.94-95h: काल पर किसी का वश नहीं। वह सदैव जागृत रहता है और सभी प्राणियों को कष्ट देता रहता है। वह कभी लौटने वाला नहीं है। काल के वश में पड़ा हुआ प्राणी उससे मुक्त नहीं हो सकता॥ 94 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
काल पर किसी का वश नहीं। वह सदैव जागृत रहता है और सभी प्राणियों को कष्ट देता रहता है। वह कभी लौटने वाला नहीं है। काल के वश में पड़ा हुआ प्राणी उससे मुक्त नहीं हो सकता॥ 94 1/2॥
‘No one has control over Kaal. He is always alert and keeps on tormenting all beings. He is never going to return. A creature who is under the control of Kaal cannot get rid of him.॥ 94 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥