Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.227.89-90: हे दैत्यराज! मेरे हाथ को वज्र और वरुण के पाश से उठा हुआ देखकर, मुझे मारने के लिए आया हुआ मृत्यु का हृदय भी काँप रहा है; फिर ऐसा कौन है जिसका मन व्याकुल न हो? आपका मन स्थिर है और सत्य को जानने वाला है, इसलिए वह तनिक भी व्याकुल नहीं होता ॥ 89-90॥ | mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सवज्रमुद्यतं बाहुं दृष्ट्वा पाशांश्च वारुणान्॥ ८९॥
कस्येह न व्यथेद् बुद्धिर्मृत्योरपि जिघांसत:।
सा ते न व्यथते बुद्धिरचला तत्त्वदर्शिनी॥ ९०॥
अनुवाद
हे दैत्यराज! मेरे हाथ को वज्र और वरुण के पाश से उठा हुआ देखकर, मुझे मारने के लिए आया हुआ मृत्यु का हृदय भी काँप रहा है; फिर ऐसा कौन है जिसका मन व्याकुल न हो? आपका मन स्थिर है और सत्य को जानने वाला है, इसलिए वह तनिक भी व्याकुल नहीं होता ॥ 89-90॥
‘O King of demons! Seeing my hand raised with the thunderbolt and the noose of Varuna, even the heart of death which has come with the intention of killing me trembles; then who else is there whose mind is not troubled? Your mind is steadfast and knows the truth; therefore it is not disturbed at all. ॥ 89-90॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥