श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 88-89h
 
 
श्लोक  12.227.88-89h 
एवमुक्त: सहस्राक्षो भगवान् पाकशासन:॥ ८८॥
प्रतिसंहृत्य संरम्भमित्युवाच शतक्रतु:।
 
 
अनुवाद
जब बालिके ने ऐसा कहा, तब जगत् के हजार नेत्रों वाले अधिपति भगवान् इन्द्र ने अपना क्रोध रोककर इस प्रकार कहा - 88 1/2॥
 
When Balike said this, Lord Indra, the thousand-eyed ruler of the world, restrained his anger and said thus - 88 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)