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न च कालेन कालज्ञ: स्पृष्ट: शोचितुमर्हति॥ ८६॥
तेन शक्र न शोचामि नास्ति शोके सहायता।
अनुवाद
हे इन्द्र! जो मनुष्य काल के प्रभाव को जानता है, वह दुःखी होने पर भी शोक नहीं करता; क्योंकि शोक विपत्ति को दूर करने में सहायक नहीं होता, इसलिए मैं शोक नहीं करता।
Indra! He who knows the effects of time, even when afflicted by it, does not grieve; because grief is of no help in removing the calamity, therefore I do not grieve. 86 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥