Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.227.85-86h: मनुष्य काल का सहारा लेकर उन कर्मों को करके सुखी हो जाता है, परंतु काल का सहारा न मिलने के कारण उन्हीं कर्मों को पुनः करने से वह दुःख का भागी बन जाता है। | mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनुष्य काल का सहारा लेकर उन कर्मों को करके सुखी हो जाता है, परंतु काल का सहारा न मिलने के कारण उन्हीं कर्मों को पुनः करने से वह दुःख का भागी बन जाता है।
A man becomes happy by doing those deeds with the support of time, but by doing the same deeds again due to not getting the support of time, he becomes a part of sorrow.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥