श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 83-84h
 
 
श्लोक  12.227.83-84h 
लाभालाभौ सुखं दु:खं कामक्रोधौ भवाभवौ॥ ८३॥
वधबन्धप्रमोक्षं च सर्वं कालेन लभ्यते।
 
 
अनुवाद
मनुष्य का लाभ-हानि, सुख-दुःख, काम-क्रोध, उत्थान-पतन, मृत्यु, कारावास और कारावास से मुक्ति - ये सब काल (भाग्य) द्वारा ही प्राप्त होते हैं।
 
A man's gain and loss, pleasure and pain, lust and anger, rise and fall, death, imprisonment and release from imprisonment - all these are received by time (destiny) only. 83 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)