Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.227.80: ऐसा नहीं है कि तुम्हारे हाथ में वज्र होने पर भी मैं तुम्हें केवल मुक्का मारकर यमलोक नहीं भेज सकता। परन्तु यह समय मेरे लिए पराक्रम दिखाने का नहीं, अपितु क्षमा करने का है ॥80॥ | mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न हि त्वां नोत्सहे हन्तुं सवज्रमपि मुष्टिना।
न तु विक्रमकालोऽयं क्षमाकालोऽयमागत:॥ ८०॥
अनुवाद
ऐसा नहीं है कि तुम्हारे हाथ में वज्र होने पर भी मैं तुम्हें केवल मुक्का मारकर यमलोक नहीं भेज सकता। परन्तु यह समय मेरे लिए पराक्रम दिखाने का नहीं, अपितु क्षमा करने का है ॥80॥
It is not the case that I cannot send you to Yamaloka just by punching you even though you have a thunderbolt in your hand. But this is not the time for me to show my might, but to forgive. ॥ 80॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥