Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.227.78-79: मेरे वेग के कारण समस्त देवतागण युद्धभूमि छोड़कर एक साथ भाग गए थे। मैंने वन और वनवासियों सहित अनेक पर्वतों को तुम पर बार-बार भेजा था। मैंने तुम्हारे सिरों पर दृढ़ शिलाओं और शिखरों से अनेक पर्वतों को भी तोड़ डाला था; किन्तु इस समय मैं क्या कर सकता हूँ; क्योंकि काल को पार करना अत्यन्त कठिन है। 78-79। | mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
समेता विबुधा भग्नास्तरसा समरे मया।
पर्वताश्चासकृत् क्षिप्ता: सवना: सवनौकस:॥ ७८॥
सटङ्कशिखरा भग्ना: समरे मूर्ध्नि ते मया।
किं नु शक्यं मया कर्तुं कालो हि दुरतिक्रम:॥ ७९॥
अनुवाद
मेरे वेग के कारण समस्त देवतागण युद्धभूमि छोड़कर एक साथ भाग गए थे। मैंने वन और वनवासियों सहित अनेक पर्वतों को तुम पर बार-बार भेजा था। मैंने तुम्हारे सिरों पर दृढ़ शिलाओं और शिखरों से अनेक पर्वतों को भी तोड़ डाला था; किन्तु इस समय मैं क्या कर सकता हूँ; क्योंकि काल को पार करना अत्यन्त कठिन है। 78-79।
Due to my speed all the gods left the battlefield and ran away together. I had repeatedly sent many mountains along with the forests and forest dwellers upon you. I had also broken many mountains with strong rocks and peaks on your heads; but what can I do at this time; because it is very difficult to cross the time. 78-79.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥