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mahabharat 12.227.75-76h: आप मेरे पहले के प्रयासों को सबसे अच्छी तरह जानते हैं। आपने कई युद्धों में मेरा पराक्रम देखा है। इस समय तो बस एक उदाहरण ही काफी होगा। 75 1/2   |   mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 75-76h
 
 
श्लोक  12.227.75-76h 
त्वमेव हि पुरा वेत्थ यत् तदा पौरुषं मम॥ ७५॥
समरेषु च विक्रान्तं पर्याप्तं तन्निदर्शनम्।
 
 
अनुवाद
आप मेरे पहले के प्रयासों को सबसे अच्छी तरह जानते हैं। आपने कई युद्धों में मेरा पराक्रम देखा है। इस समय तो बस एक उदाहरण ही काफी होगा। 75 1/2
 
You know best about the efforts I have made earlier. You have seen my prowess in many wars. At this time, just one example will be enough. 75 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)