Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.227.74-75h: इंद्र! आप हमारी स्थिति अच्छी तरह जानते हैं। वासव! मैं आपको अच्छी तरह जानता हूँ; फिर भी आप अपनी लज्जा को अनदेखा करके मेरे सामने व्यर्थ ही अपनी प्रशंसा क्यों कर रहे हैं? वास्तव में यह सब समय ही करवा रहा है। 74 1/2। | mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वमेव हीन्द्र वेत्थास्मान् वेदाहं त्वां च वासव॥ ७४॥
किं कत्थसे मां किं च त्वं कालेन निरपत्रप:।
अनुवाद
इंद्र! आप हमारी स्थिति अच्छी तरह जानते हैं। वासव! मैं आपको अच्छी तरह जानता हूँ; फिर भी आप अपनी लज्जा को अनदेखा करके मेरे सामने व्यर्थ ही अपनी प्रशंसा क्यों कर रहे हैं? वास्तव में यह सब समय ही करवा रहा है। 74 1/2।
Indra! You know very well how we are. Vasava! I know you very well; yet why are you ignoring your shame and praising yourself in vain in front of me. In reality it is time that is making all this happen. 74 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥