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सुचित्रे जीवलोकेऽस्मिन्नुपास्य: कालपर्ययात्।
किं हि कृत्वा त्वमिन्द्रोऽद्य किं वा कृत्वा वयं च्युता:॥ ७२॥
अनुवाद
समय के फेर से आप इस विचित्र प्राणी जगत में सबके आदर्श बन गए हैं। बताइए, आपने ऐसा कौन सा पुण्य कर्म किया था कि आज इंद्र बन गए और हमने ऐसा कौन सा पाप कर्म किया था कि इंद्र पद से गिर गए?
Due to the twists and turns of time, you have become the idol of everyone in this strange world of living beings. Tell me, what good deed did you perform to become Indra today and what bad deed did we commit to fall from the position of Indra.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥