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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 70-71
 
 
श्लोक  12.227.70-71 
यत् तद् वर्षसहस्रान्तं पूर्णं भवितुमर्हति॥ ७०॥
यथा मे सर्वगात्राणि न सुस्थानि महौजस:।
अहमैन्द्राच्च्युत: स्थानात् त्वमिन्द्र: प्रकृतो दिवि॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
देवताओं के हजारों वर्ष समाप्त होने वाले हैं, जब तक तुम्हें इंद्र के सिंहासन पर रहना है। काल के प्रभाव से इस महाबली योद्धा के शरीर के सभी अंग अब स्वस्थ नहीं रहे। मुझे इंद्र के सिंहासन से नीचे गिरा दिया गया है और तुम्हें स्वर्ग का इंद्र बना दिया गया है।
 
The thousands of years of the Gods are about to end, as long as you have to stay on the throne of Indra. Due to the effect of time, all the body parts of this mighty warrior are no longer healthy. I have been thrown down from the throne of Indra and you have been made Indra in heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)