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mahabharat 12.227.69-70h: अन्यथा संसार में ऐसा कौन वीर है जो युद्ध में कुपित होकर मेरे सामने खड़ा हो सके? हे इन्द्र! शक्तिशाली काल (अदृश्य) ने मुझ पर आक्रमण किया है, इसीलिए तुम मेरे सामने खड़े हो।   |   mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 69-70h
 
 
श्लोक  12.227.69-70h 
को हि स्थातुमलं लोके मम क्रुद्धस्य संयुगे॥ ६९॥
कालस्तु बलवान् प्राप्तस्तेन तिष्ठसि वासव।
 
 
अनुवाद
अन्यथा संसार में ऐसा कौन वीर है जो युद्ध में कुपित होकर मेरे सामने खड़ा हो सके? हे इन्द्र! शक्तिशाली काल (अदृश्य) ने मुझ पर आक्रमण किया है, इसीलिए तुम मेरे सामने खड़े हो।
 
Otherwise, who is such a brave man in the world who can stand before me when enraged in a war? Indra! The powerful Kaal (unseen) has attacked me, that is why you are standing before me. 69 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)