Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.227.67-68h: देवेन्द्र! इस समय तुम मुझे भयभीत कर रहे हो और अपनी वाणी से मुझे छेद रहे हो। मैं अपने को संयमित रखते हुए चुपचाप बैठा हूँ; इसीलिए तुम अपने को बहुत महान समझने लगे होगे।   |   mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 67-68h
 
 
श्लोक  12.227.67-68h 
त्रासयन्निव देवेन्द्र वाग्भिस्तक्षसि मामिह॥ ६७॥
संयते मयि नूनं त्वमात्मानं बहु मन्यसे।
 
 
अनुवाद
देवेन्द्र! इस समय तुम मुझे भयभीत कर रहे हो और अपनी वाणी से मुझे छेद रहे हो। मैं अपने को संयमित रखते हुए चुपचाप बैठा हूँ; इसीलिए तुम अपने को बहुत महान समझने लगे होगे।
 
Devendra! At this time you are frightening me and piercing me with your words. I am sitting quietly, keeping myself under control; that is why you must have started considering yourself very great. 67 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)