Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.227.66-67h: इंद्र! मैं सदैव सतर्क रहा, किन्तु यदि कभी आलसी न रहने वाली मृत्यु ने मुझ पर आक्रमण किया, तो शीघ्र ही वह मृत्यु तुम पर भी आक्रमण करेगी। इस कटु सत्य के लिए मुझे क्षमा करें। 66 1/2। | mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मां चेदभ्यागत: काल: सदा युक्तमतन्द्रित:॥ ६६॥
क्षमस्व नचिरादिन्द्र त्वामप्युपगमिष्यति।
अनुवाद
इंद्र! मैं सदैव सतर्क रहा, किन्तु यदि कभी आलसी न रहने वाली मृत्यु ने मुझ पर आक्रमण किया, तो शीघ्र ही वह मृत्यु तुम पर भी आक्रमण करेगी। इस कटु सत्य के लिए मुझे क्षमा करें। 66 1/2।
Indra! I was always cautious, but if the never lazy death attacked me, then you will also be attacked by that death very soon. Please forgive me for this bitter truth. 66 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥