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mahabharat 12.227.63-64h: इन्द्र! वे सभी राजा अपने तेज से तेजस्वी और प्रतापी थे, किन्तु काल ने उन सभी को नष्ट कर दिया। जब तुम इस पृथ्वी का भोग करके चले जाओगे, तब तुम अपने शोक को रोक नहीं पाओगे। 63 1/2   |   mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 63-64h
 
 
श्लोक  12.227.63-64h 
ज्वलन्त: प्रतपन्तश्च कालेन प्रतिसंहृता:।
त्वं चैवेमां यदा भुक्त्वा पृथिवीं त्यक्षसे पुन:॥ ६३॥
न शक्ष्यसि तदा शक्र नियन्तुं शोकमात्मन:।
 
 
अनुवाद
इन्द्र! वे सभी राजा अपने तेज से तेजस्वी और प्रतापी थे, किन्तु काल ने उन सभी को नष्ट कर दिया। जब तुम इस पृथ्वी का भोग करके चले जाओगे, तब तुम अपने शोक को रोक नहीं पाओगे। 63 1/2
 
Indra! All those kings were radiant and majestic in their splendour, but time destroyed them all. When you leave this earth after enjoying it, you will not be able to control your grief. 63 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)