vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन
»
श्लोक 60
श्लोक
12.227.60
सर्वे वेदव्रतपरा: सर्वे चैव बहुश्रुता:।
सर्वे सम्मतमैश्वर्यमीश्वरा: प्रतिपेदिरे॥ ६०॥
अनुवाद
वे सभी वैदिक व्रतों का पालन करने वाले विद्वान थे। वे सभी जगत के स्वामी थे और उन्होंने अभीष्ट समृद्धि प्राप्त कर ली थी।
All of them observed the Vedic vows and were learned scholars. All of them were lords of the world and had achieved the desired prosperity. 60.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×