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mahabharat 12.227.59: समरांगण में पहुँचकर उन सब लोगों की कभी पराजय नहीं सुनी गई। सब लोग सत्यव्रत का पालन करने और इच्छानुसार विचरण करने को तत्पर थे। 59॥   |   mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  12.227.59 
सर्वे समरमासाद्य न श्रूयन्ते पराजिता:।
सर्वे सत्यव्रतपरा: सर्वे कामविहारिण:॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
समरांगण में पहुँचकर उन सब लोगों की कभी पराजय नहीं सुनी गई। सब लोग सत्यव्रत का पालन करने और इच्छानुसार विचरण करने को तत्पर थे। 59॥
 
All those people were never heard of being defeated after reaching Samarangana. Everyone was ready to follow the Satyavrat and roam around as per their wish. 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)