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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  12.227.58 
सर्वे संहननोपेता: सर्वे परिघबाहव:।
सर्वे मायाशतधरा: सर्वे ते कामरूपिण:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
वे सभी बलवान शरीर से सुशोभित थे। उनकी भुजाएँ लोहे की छड़ों के समान मोटी और मजबूत थीं। वे सभी सैकड़ों प्रकार की माया जानते थे और इच्छानुसार रूप धारण करते थे।
 
All of them were adorned with strong bodies. Their arms were as thick and strong as iron rods. All of them knew hundreds of illusions and assumed forms as per their wish.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)