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mahabharat 12.227.47-48h: पुरंदर! अब तक इसने कितने राजाओं को त्यागा है, मैं गिन नहीं सकता। तुम्हारे बाद भी कई राजा इस पर दावा करेंगे। 47 1/2   |   mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  12.227.47-48h 
राजलोका ह्यतिक्रान्ता यान्न संख्यातुमुत्सहे॥ ४७॥
त्वत्तो बहुतराश्चान्ये भविष्यन्ति पुरंदर।
 
 
अनुवाद
पुरंदर! अब तक इसने कितने राजाओं को त्यागा है, मैं गिन नहीं सकता। तुम्हारे बाद भी कई राजा इस पर दावा करेंगे। 47 1/2
 
Purandar! I cannot count the number of kings it has abandoned till now. Even after you, many kings will claim it. 47 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)