Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.227.44: हे प्रभु! आप उस राज्य को मानते हैं जो विश्वसनीय नहीं है, क्योंकि वह नाशवान है और जो अस्थिर है, उसे आप स्थिर मानते हैं; परंतु इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है; क्योंकि जिसका हृदय काल ने बंदी कर लिया है, उसके मन में सदैव ऐसे ही विपरीत भाव होते हैं ॥ 44॥ | mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे प्रभु! आप उस राज्य को मानते हैं जो विश्वसनीय नहीं है, क्योंकि वह नाशवान है और जो अस्थिर है, उसे आप स्थिर मानते हैं; परंतु इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है; क्योंकि जिसका हृदय काल ने बंदी कर लिया है, उसके मन में सदैव ऐसे ही विपरीत भाव होते हैं ॥ 44॥
O lord! You believe in a kingdom which is not trustworthy because it is perishable and you consider that which is unstable to be stable; but there is nothing surprising in this; because the person whose heart is captured by time always has such opposite feelings. ॥ 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥