Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.227.42-43: इस शरीर को पाकर तुम अपने को समस्त प्राणियों को जन्म देने वाले सनातन भगवान ब्रह्मा के समान महान मानते हो; परंतु तुम्हारा यह इन्द्रपद आज तक (किसी के लिए भी) अटल या शाश्वत सिद्ध नहीं हुआ - इस पर अनेक लोग आए और गए हैं। केवल तुम ही अपनी मूढ़ बुद्धि के कारण इसे अपना मानते हो ॥ 42-43॥ | mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस शरीर को पाकर तुम अपने को समस्त प्राणियों को जन्म देने वाले सनातन भगवान ब्रह्मा के समान महान मानते हो; परंतु तुम्हारा यह इन्द्रपद आज तक (किसी के लिए भी) अटल या शाश्वत सिद्ध नहीं हुआ - इस पर अनेक लोग आए और गए हैं। केवल तुम ही अपनी मूढ़ बुद्धि के कारण इसे अपना मानते हो ॥ 42-43॥
Having obtained this body, you consider yourself to be very great like the eternal God Brahma, who gives birth to all living beings; but this position of Indra of yours has not proved to be steadfast or eternal till date (for anyone) - many have come and gone on this. Only you consider it yours due to your foolish intellect. ॥ 42-43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥