Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.227.41: प्रत्येक युग में (प्रत्येक मन्वन्तर में) इन्द्रियों के परिवर्तन के कारण अब तक देवताओं के हजारों इन्द्र काल के चंगुल में जा चुके हैं; अतः काल का उल्लंघन करना किसी के लिए भी अत्यंत कठिन है ॥ 41॥ | mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बहूनीन्द्रसहस्राणि दैवतानां युगे युगे।
अभ्यतीतानि कालेन कालो हि दुरतिक्रम:॥ ४१॥
अनुवाद
प्रत्येक युग में (प्रत्येक मन्वन्तर में) इन्द्रियों के परिवर्तन के कारण अब तक देवताओं के हजारों इन्द्र काल के चंगुल में जा चुके हैं; अतः काल का उल्लंघन करना किसी के लिए भी अत्यंत कठिन है ॥ 41॥
Due to the change of senses in each age (in each Manvantar), till now thousands of Indras of the gods have gone into the clutches of time; hence it is extremely difficult for anyone to violate time. ॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥