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mahabharat 12.227.4-5h: दुःख का अभाव सुख और अच्छे स्वास्थ्य को उत्पन्न करता है; जब शरीर स्वस्थ होता है, तो मनुष्य पुनः धन प्राप्त कर सकता है।   |   mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 4-5h
 
 
श्लोक  12.227.4-5h 
विशोकता सुखं धत्ते धत्ते चारोग्यमुत्तमम्॥ ४॥
आरोग्याच्च शरीरस्य स पुनर्विन्दते श्रियम्।
 
 
अनुवाद
दुःख का अभाव सुख और अच्छे स्वास्थ्य को उत्पन्न करता है; जब शरीर स्वस्थ होता है, तो मनुष्य पुनः धन प्राप्त कर सकता है।
 
Absence of sorrow produces happiness and good health; when the body is healthy, a man can again acquire wealth. 4 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)