श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  12.227.38 
नित्यं कालपरीतस्य मम वा मद्विधस्य वा।
बुद्धिर्व्यसनमासाद्य भिन्ना नौरिव सीदति॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
मैं हो या मेरे जैसा कोई अन्य व्यक्ति, जब किसी मनुष्य पर काल (भाग्य) का आक्रमण होता है, तब उसकी बुद्धि सदैव संकट में पड़कर टूटी हुई नाव के समान दुर्बल हो जाती है ॥ 38॥
 
Be it me or any other person like me, when a person is attacked by time (destiny), then his intellect always gets weakened like a torn boat after getting into trouble. ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)