Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.227.36: इन्द्र! तुम्हारी बुद्धि साधारण है, इसलिए तुम यह नहीं समझ पा रहे हो कि एक-न-एक दिन तुम्हारा नाश अवश्य होगा। इस संसार में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो तुम्हें तुम्हारे पराक्रम से महान समझते हैं और तुम्हें अधिक महत्व देते हैं ॥ 36॥   |   mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.227.36 
इन्द्र प्राकृतया बुद्धॺा प्रलयं नावबुद्धॺसे।
केचित् त्वां बहु मन्यन्ते श्रैष्ठॺं प्राप्तं स्वकर्मणा॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र! तुम्हारी बुद्धि साधारण है, इसलिए तुम यह नहीं समझ पा रहे हो कि एक-न-एक दिन तुम्हारा नाश अवश्य होगा। इस संसार में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो तुम्हें तुम्हारे पराक्रम से महान समझते हैं और तुम्हें अधिक महत्व देते हैं ॥ 36॥
 
Indra! Your intellect is ordinary; therefore you are unable to understand that one day or the other you will surely be destroyed. There are some people in this world who consider you to have attained greatness by your own prowess and give you more importance. ॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)