Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.227.34: यदि कर्म करनेवाला स्वयं कर्ता होता, तो उसे बनानेवाला कोई दूसरा कभी न होता। वह किसी और के द्वारा रचा गया है; अतः काल के अतिरिक्त कोई दूसरा कर्ता नहीं है ॥34॥ | mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि कर्ता भवेत् कर्ता न क्रियेत कदाचन।
यस्मात्तु क्रियते कर्ता तस्मात् कर्ताप्यनीश्वर:॥ ३४॥
अनुवाद
यदि कर्म करनेवाला स्वयं कर्ता होता, तो उसे बनानेवाला कोई दूसरा कभी न होता। वह किसी और के द्वारा रचा गया है; अतः काल के अतिरिक्त कोई दूसरा कर्ता नहीं है ॥34॥
If the person doing the work was the doer himself, then there would never have been anyone else to create it. It is created by someone else; hence there is no other doer except time. ॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥