श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.227.32 
नागामिनमनर्थं हि प्रतिघातशतैरपि।
शक्नुवन्ति प्रतिव्योढुमृते बुद्धिबलान्नरा:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य अपनी बुद्धि के अतिरिक्त किसी अन्य साधन का प्रयोग किए बिना सैकड़ों प्रयत्न करके भी आने वाली विपत्ति को नहीं रोक सकते ॥32॥
 
Human beings cannot stop the coming disaster even by making hundreds of attempts using nothing other than their intelligence. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)