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mahabharat 12.227.3-4h: भीष्म बोले, "हे राजा युधिष्ठिर! यदि कोई मनुष्य जिसकी स्त्री और पुत्र मर गए हों, जिसका सुख छिन गया हो या जिसका धन नष्ट हो गया हो और जो इन कारणों से कठिन परिस्थिति में फँसा हो, तो उसके लिए धैर्य धारण करना ही श्रेयस्कर है। धैर्य से युक्त उत्तम पुरुष का शरीर चिन्ता के कारण नष्ट नहीं होता। 3 1/2।   |   mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 3-4h
 
 
श्लोक  12.227.3-4h 
भीष्म उवाच
पुत्रदारै: सुखैश्चैव वियुक्तस्य धनेन वा।
मग्नस्य व्यसने कृच्छ्रे धृति: श्रेयस्करी नृप॥ ३॥
धैर्येण युक्तस्य सत: शरीरं न विशीर्यते।
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "हे राजा युधिष्ठिर! यदि कोई मनुष्य जिसकी स्त्री और पुत्र मर गए हों, जिसका सुख छिन गया हो या जिसका धन नष्ट हो गया हो और जो इन कारणों से कठिन परिस्थिति में फँसा हो, तो उसके लिए धैर्य धारण करना ही श्रेयस्कर है। धैर्य से युक्त उत्तम पुरुष का शरीर चिन्ता के कारण नष्ट नहीं होता। 3 1/2।
 
Bhishma said, "O King Yudhishthira! If a person whose wife and son have died, whose happiness has been snatched away or whose wealth has been destroyed and who is trapped in a difficult situation due to these reasons, then it is good for him to have patience. The body of a good man who is endowed with patience does not get destroyed due to worries. 3 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)