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mahabharat 12.227.28: प्रत्येक मनुष्य को बारी-बारी से सुख-दुःख का अनुभव होता है। हे इन्द्र! तुमने भी अपने पराक्रम से नहीं, अपितु काल के प्रभाव से इन्द्र पद प्राप्त किया है। 28।   |   mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.227.28 
सुखदु:खे हि पुरुष: पर्यायेणाधिगच्छति।
पर्यायेणासि शक्रत्वं प्राप्त: शक्र न कर्मणा॥ २८॥
 
 
अनुवाद
प्रत्येक मनुष्य को बारी-बारी से सुख-दुःख का अनुभव होता है। हे इन्द्र! तुमने भी अपने पराक्रम से नहीं, अपितु काल के प्रभाव से इन्द्र पद प्राप्त किया है। 28।
 
Every man experiences happiness and sorrow in turns. Indra! You too have attained the position of Indra not by your prowess but by the passage of time. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)