Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.227.27: मैं भी आज तुम्हारे समान ही था और तुम्हारी भी वही दशा होगी जो आज है; इसलिए यह सोचकर मेरा अपमान न करो कि मैंने कोई बहुत कठिन कार्य किया है ॥27॥   |   mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.227.27 
अहमासं यथाद्य त्वं भविता त्वं यथा वयम्।
मावमंस्था मया कर्म दुष्कृतं कृतमित्युत॥ २७॥
 
 
अनुवाद
मैं भी आज तुम्हारे समान ही था और तुम्हारी भी वही दशा होगी जो आज है; इसलिए यह सोचकर मेरा अपमान न करो कि मैंने कोई बहुत कठिन कार्य किया है ॥27॥
 
I was once like you today and you too will be in the same condition as we are now; therefore, do not insult me ​​thinking that I have performed a very difficult feat. ॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)