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mahabharat 12.227.26: हे वज्रधारी इन्द्र! आज आपको ऐसे राजसी वैभव प्राप्त हुए हैं या हम इस दयनीय अवस्था को प्राप्त हुए हैं, यह सब न तो आपका कर्तृत्व है और न हमारा कर्तृत्व है॥26॥   |   mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.227.26 
नैतदस्मत्कृतं शक्र नैतच्छक्र कृतं त्वया।
यत् त्वमेवंगतो वज्रिन् यद्वाप्येवंगता वयम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे वज्रधारी इन्द्र! आज आपको ऐसे राजसी वैभव प्राप्त हुए हैं या हम इस दयनीय अवस्था को प्राप्त हुए हैं, यह सब न तो आपका कर्तृत्व है और न हमारा कर्तृत्व है॥26॥
 
O thunderbolt-bearing Indra! Today you are blessed with such royal splendors or we have reached this pitiable state, all this is neither your doing nor our doing. ॥26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)