Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.227.25: इसलिए हे देवराज! आप ऐसा स्वभाव न रखें; ऐसा न सोचें कि मैंने अपने बल और पराक्रम से ही समस्त प्राणियों के स्वामी मुझ पर विजय प्राप्त कर ली है॥ 25॥ | mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मा च तेऽभूत् स्वभावोऽयमिति ते देवपुङ्गव।
ईश्वर: सर्वभूतानां विक्रमेण जितो बलात्॥ २५॥
अनुवाद
इसलिए हे देवराज! आप ऐसा स्वभाव न रखें; ऐसा न सोचें कि मैंने अपने बल और पराक्रम से ही समस्त प्राणियों के स्वामी मुझ पर विजय प्राप्त कर ली है॥ 25॥
Therefore, O King of gods, do not let your nature be like this; do not think that by my own strength and valour I have obtained victory over me, the Lord of all creatures. ॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥