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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.227.18 
बद्धश्च वारुणै: पाशैर्वज्रेण च समाहत:।
हृतदारो हृतधनो ब्रूहि कस्मान्न शोचसि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तुम वरुण के पाश से बँधे हुए थे, वज्र से घायल हो गए थे, तुम्हारी पत्नी और धन का भी हरण हो गया था; फिर भी बताओ, तुम्हें शोक क्यों नहीं हुआ?
 
'You were bound by Varuna's noose, wounded by thunderbolts, and your wife and wealth were also abducted; yet tell me, how come you are not grieving?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)