श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.227.17 
ईश्वरो हि पुरा भूत्वा पितृपैतामहे पदे।
तत्त्वमद्य हृतं दृष्ट्वा सपत्नै: किं न शोचसि॥ १७॥
 
 
अनुवाद
पहले आप अपने पूर्वजों के राज्य पर विराजमान होकर तीनों लोकों के ईश्वर थे। अब वह राज्य शत्रुओं ने छीन लिया है; यह देखकर भी आपको दुःख क्यों नहीं होता?॥17॥
 
‘Earlier you were the God of the three worlds, sitting on the kingdom of your forefathers. Now that kingdom has been snatched away by the enemies; why do you not feel sad even after seeing this?॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)