Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.227.17: पहले आप अपने पूर्वजों के राज्य पर विराजमान होकर तीनों लोकों के ईश्वर थे। अब वह राज्य शत्रुओं ने छीन लिया है; यह देखकर भी आपको दुःख क्यों नहीं होता?॥17॥ | mahabharat अध्याय 12.227: इन्द्र और बलिका संवाद—काल और प्रारब्धकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ईश्वरो हि पुरा भूत्वा पितृपैतामहे पदे।
तत्त्वमद्य हृतं दृष्ट्वा सपत्नै: किं न शोचसि॥ १७॥
अनुवाद
पहले आप अपने पूर्वजों के राज्य पर विराजमान होकर तीनों लोकों के ईश्वर थे। अब वह राज्य शत्रुओं ने छीन लिया है; यह देखकर भी आपको दुःख क्यों नहीं होता?॥17॥
‘Earlier you were the God of the three worlds, sitting on the kingdom of your forefathers. Now that kingdom has been snatched away by the enemies; why do you not feel sad even after seeing this?॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥